Monday, May 11, 2009

होली (शिव जी की)

ये होली पंडित मिश्रा के स्वर में सुनी थी बहुत साल पहले, सीधे बनारस से लाइव:
पेश है:
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खेलैं मसाने में होरी दिगंबर खेले मसाने में होरी
भूत पिशाच बटोरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी.
लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के,
चिता, भस् भर झोरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी.
गोप गोपी श्याम राधा, ना कोई रोक ना, कौनाऊ बाधा
ना साजन ना गोरी,
‍‍ना साजन ना गोरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी.
नाचत गावत डमरूधारी, छोड़ै सर्प-गरल पिचकारी
पीतैं प्रेत-धकोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी.
भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज की गोरी
धन-धन नाथ अघोरी दिगंबर खेलैं मसाने में होरी.

5 comments:

sidheshwer said...

प्रेम भाई,
आ[पकी पोस्ट देख मब हरा हुआ,
खेलें मसाने में होली दिगंबर: पंडित छन्नूलाल मिश्रा के स्वर में अगर फिर सुनना चाहें तो यहाँ का फेरा लगा लें.
http://radiovani.blogspot.com/2009/03/khele-masane-me-holi-digambar.html

स्वप्नदर्शी said...

Thanks Prem.

Sid, you have gained some experties in posting songs. Why not here?

sidheshwer said...

jaroor

Prem said...

Also have a look here!
http://champawatsechennaitak.blogspot.com/

स्वप्नदर्शी said...

Thanks Prem for the link of this wonderful article about your family. For a year or so we met almost everyday to discuss our world view but so little we knew about each other. I am happy that we are reconnected by blog duniya again.

I will draw hope from this always and tell others too.


How about posting this story in Hindi. Most young students specially from the underprivileged background will be able to read Hindi but not English.


Can anybody translate?